दोहा - गुरु कृपा से संत जना, पावे परम सुख धाम।
संत रुप घर अवतरे, बाबा मौजी राम॥
दोहा - खाखोली में जन्मिया, जाँगिड़ कुल परिवार।
पूर्व जन्म का भाग से कृपा करी करतार॥
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राम रस पी लियो सा, जग में बाबो मौजीदास॥टेर॥
खाखोली में जनम लियो, जाँगिड़ वंश में नाम कियो।
राम नाम मन भाय गयो ऐसी लागी आस॥टेर॥
राम रस…
प्रथम वैराग दक्षिण में जाग्या, मन का भ्रम सब भाग्या।
राम नाम रटने को लाग्या, छोड़ी जग की आस॥टेर॥
राम रस…
देख वैराग लोग यूं कहवे, मन ही मन में बात बणावे।
बाबो सा घर में लख जावे, अलख निरंजन पास॥टेर॥
राम रस…
अलख निरंजन जाप जपे, जय साहब की टेर रटे।
भगतों के सब कष्ट कटे, सदा आप की आस॥टेर॥
राम रस…
जाय अडकसर धूणा धुकाया, दुनियां का बहुकष्ट मिटाया।
भक्तों का करज्यो चित चाया, कल्लू चरण कोदास॥टेर॥
राम रस…
भजन
तर्ज - रावणा रे देश गयो, सीता को संदेश लायो
दोहा-प्रथम विनय है आप से, थे सामर्थ बलवान।
रिद्धि सिद्धि अरू संपती, दिज्यो संत सुजान॥
सतगुरू मौजी महाराज, सिद्ध करो मन के काज।
रखियो हमारी लाज, दास में तुम्हारो जी॥टेर॥
छन्द दोहा जानूं नांही, दद अक्षर को टालो सांई।
मौजीदास मन को मांही, प्रेम है तुम्हारो जी॥१॥
आप हो भक्तों केदास, दुष्टन हूं को करो नाश।
दर्शन की लागी आस, बेगा ही पधारो जी॥२॥
दीजिये गुरू जी दर्शन, कर देवो थे मन को प्रसन्न।
तन मन धन अर्पन, आपसे नहीं न्यारो जी॥३॥
कब से खड़ा हूं द्वार, सामर्थ को करूं पुकार।
नाम तणुं है आधार, नैया पार उतारो जी॥४॥
जो बाबा का नाम उच्चा रे, बाबा कष्ट कलेश निवारे।
तुम हो भक्तों के रखवारे, भव से पार उतारो जी॥५॥
कहे कल्लू मौजीराम रखना याद सुबह और शाम।
सामर्थ को करू प्रणाम, काज भी सुधारों जी॥६॥
भजन
लगन लागी रे म्हाने मौजी पावन की
पावन की रे घर आवन की॥टेर॥ लगन…
छोड़ काज और लाज जगत की,
निश दिन ध्यान लगावन की॥टेर॥ लगन…
झिल मिल कारी ज्योत निराली,
जैसे बिजली सावन की॥टेर॥ लगन…
सुरत उजाली खुल गई ताली,
गगन महल घर जावन की॥टेर॥ लगन…
नन्द किशोर तो करे विनती,
भव सागर पार लघावन की॥टेर॥ लगन…