ओमदासजी महाराज का जन्म ढेर का बास गांव, जिला सीकर में जगदीश ब्राह्मण के घर कुलवन्ति नारी की कोख से हुआ। बालक जन्म से मेघावी एवं भक्ति - भाव का सदाचार बालक रहा। दो वर्ष की अवस्था में भक्ति के विशेष अंकुर प्रस्कुटित होने लगे। भक्ति भाव वेग से वह मंदिर जाना, कोर्तन करना, भजन एवं नृत्य करने लगते। माता-पिता ने ही नाम ओम रखा। ओम बड़ा हुआ और गांव की ही स्कूल में पढ़ने, लिखने जाने लगा। किन्तु ओम का हरिकीर्तन एवं भजन में मन अधिक लगता था। अत: ब्राह्मण दम्पति ने ८-९[8-9] वर्ष की आयु में ओम को सांवलदास जी महाराज अड़कसर को सुर्पुद कर दिया। सांवलदास जी महाराज ने सन्यासी दीक्षा देकर इनका नाम ओमदास महाराज रखा। ओमदास जी महाराज का सरल निर्मल स्वभाव और जन सेवा उन्हें विशिष्ट बनाती रही है। उनका व्यक्तित्व दिन-प्रतिदिन निखरता रहता है। वर्तमान में मौजी बाबा साहेब अड़कसर धाम के गादी पति नियुक्त है। मौजी बाबा धाम की सेवायें कर रहे हैं।